जिंदगी भर के जख्म दे गई एक चिंगारी

आनी (कुल्लू)। एक चिंगारी ने पूरे घर को राख का ढेर बना दिया। इसी के साथ दो परिवारों के 15 सदस्यों के पूरे अरमान मिट्टी में मिल गए। आनी के घलाच गांव के दो भाइयों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि एक दिन अनहोनी की एक ऐसी चिंगारी उठेगी, जो उनके अरमानों को भी अपने साथ राख में बदल देगी। शुक्रवार रात दोनोें परिवार अपने आशियाने को आंखों के सामने जलता देखते रहे। परिवार के सदस्यों के सामने उनका घर जलता रहा और वे चिंगारियों को देखने के अलावा कुछ नहीं कर पाए। रात को दस बजे तक उनके पूरे जीवन भर की पूंजी भी उसमें खाक हो चुकी थी। दोनों परिवार इस रात नहीं सो पाए। घर दो परिवारों का जला तो दु:ख में पूरा गांव शरीक था। गांव वालोें ने तो अपनी संवेदनाएं प्रकट कर दी। प्रशासन ने भी मरहम का काम कर दिया, पर एक चिंगारी आज दोनोें परिवारों को जिंदगी भर के लिए जख्म दे गई। देवी सिंह और ताराचंद के दो परिवार इस आठ कमरों के दो मंजिला मकान में अपना जीवन बसर करते थे। ताराचंद के पास घर के 6 सदस्य हैं, जबकि देवी सिंह के परिवार में 9 सदस्य हैं। दोनों के पास अब केवल एक एक कमरा है। ये स्टोर के लिए बनाए गए थे। प्रभावितों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी नहीं सोचा था कि कभी उनके परिवार के लिए एक अनहोनी घटना लेकर ऐसा दिन आएगा, जो आने वाले सपनों में बाधा डाल देगा। उन्होंने कहा कि वे भांजे की शादी के लिए जो आभूषण लाए थे, वह भी पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। वहीं दोनों परिवारों का सोने और खाने पीने का पूरा सामान भी उसमें जलकर स्वाह हो गया। उन्होंने कहा कि अब गांव वालोें से आश्रय लेना पडे़गा और दूसरा कोई चारा नहीं रहा।
इनसेट
ऐसी घटनाओं से सबक लें लोग
पहाड़ी क्षेत्र की शान कहलाने वाले लकड़ी के मकानों पर एक थोड़ी सी लापरवाही भारी पड़ती जा रही है। क्षेत्र में बने दर्जनों लकड़ी के ऐसे मकान आग की भेंट चढ़ चुके हैं। आखिर बार-बार हो रही घटनाओं के बावजूद भी कोई सीख नहीं ले रहा। आमतौर पर देखा जाता है कि सर्दी के दौरान गांव के लोग शरीर को गर्म रखने के लिए तंदूर का इस्तेमाल करते हैं। कई लोगों ने आज भी ये तंदूर लकड़ी वाले कमरों में जलाए होते हैं, ऐसे में यदि थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाती है तो कहीं न कहीं बड़ी घटनाओं का अंदेशा बना रहता है। लोगों को घटनाओं से सबक लेना होगा।

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